कानपुर न्यूज डेस्क: घाटमपुर के रेउना गांव में बड़े स्तर पर साइबर अपराध के खुलासे के बाद पुलिस की कार्रवाई तेज हो गई है। 230 पुलिसकर्मियों और ड्रोन निगरानी के बीच पकड़े गए सरगना शैलेंद्र समेत 20 आरोपियों ने पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा किया है कि कानपुर नगर और देहात के कई ग्रामीण इलाके भी अब जामताड़ा की तरह साइबर ठगी के अड्डे बन चुके हैं।
पुलिस अब फरार 17 अपराधियों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। साथ ही उस पूरे नेटवर्क को खंगाला जा रहा है, जिसके जरिए ठगी की रकम को ठिकाने लगाया जाता था। इसके लिए मोबाइल कंपनियों और बैंकों के दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है।
जांच में सामने आया कि रेउना गांव में 289 प्री-एक्टिवेटेड सिम कार्ड सक्रिय थे, जिनका इस्तेमाल ठगी के लिए किया जा रहा था। पहले जहां ठगी की रकम म्यूल अकाउंट में भेजी जाती थी, वहीं अब आरोपी ऑनलाइन पेमेंट ऐप्स के जरिए नए खाते खोलकर रकम मंगाते और फिर उसे कई खातों में ट्रांसफर कर गायब कर देते थे। आरोपियों के मोबाइल से एयरटेल पेमेंट, नावी, स्लाइस और फियो पेमेंट जैसे ऐप्स के अकाउंट भी मिले हैं।
रेउना स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा समेत करीब सात बैंकों में खोले गए 58 खातों में से 40 म्यूल अकाउंट पाए गए हैं, जिनकी जांच जारी है। पुलिस अब सचेंडी और आसपास के गांवों—गज्जापुरवा, बंधीपुरवा, खेमपुर, मोहनपुर, कैंधा और कानपुर देहात के गजनेर, दुर्गापुरवा, मन्नहापुर—पर भी नजर बनाए हुए है, जहां संदिग्ध गतिविधियां सामने आई हैं।
इस गिरोह की ठगी का शिकार बने प्रतापगढ़ के सफाईकर्मी ज्ञानदास ने दो साल पहले 85 हजार रुपये गंवाने के बाद मानसिक तनाव में आकर 30 जनवरी 2025 को आत्महत्या कर ली थी। ठगों ने उसे ड्रग्स मामले में फंसाने की धमकी देकर 26 से 28 जनवरी के बीच 32 बार कॉल कर वसूली की थी।
जब प्रतापगढ़ पुलिस जांच के लिए गांव पहुंची थी, तब स्थानीय लोगों के विरोध के चलते हालात बिगड़ गए थे और पुलिस को फायरिंग तक करनी पड़ी थी।
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के अनुसार, सभी आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी और ठगी से अर्जित संपत्तियों को भी जब्त किया जाएगा। साथ ही यह भी जांच हो रही है कि इतने बड़े पैमाने पर प्री-एक्टिवेटेड सिम कार्ड अपराधियों तक कैसे पहुंचे और इसमें किन कंपनियों की भूमिका रही।